*छत्तीसगढ़ी व्याकरण* *आज के पाठ* *काल* (समय) काल या समय के 3 प्रकार होथे। वर्तमान काल - आज/अभी जेन समय चलत हे। भूत काल - आज के पहिली जेन समय बीत चुके हे। भविष्य काल - आज के बाद जेन समय आही। ...
कविता लिखे के पहली 1,का कवि *खुद ल सम्बोधित करत हे*, यदि हाँ, त- * मैं,मोर,मोला,मैहर(एकवचन म)अउ हमर,(बहुवचन म),हो सकत हे। *तीनो काल,*उत्तम पुरुष*(स्वयं उत्तम पुरुष बर होथे) म,मैं देखत हौं/म...
छोड़ संसो हे जीना (कुण्डलियाँ छंद) जीना सीखव आज मा , छोड़ काल के बात । आहय जिनगी मा मजा , कटय बने दिन रात ।। कटय बने दिन रात , गोठ ला जी तँय सुनले । बात हवय ये सार , मने मा थोरिक गुन...
तोर सुरता मा नींद बैरी आवय नही । का करव मैं कुछू मोला भावय नही ।। तोर चेहरा मोर आंखी मा झुलत रहिथे । अन्न पानी मोला काही अब सुहावय नही ।। रात - दिन तोर सपना अब सताथे मोला । का ब...
थोड़ा कड़वा मगर वर्तमान का दर्पण है ....................... पढ़ता रचना ओ सखे , जो दे उचित विचार । बाकी रचना देख बस , देते लाइक मार ।। देते लाइक मार , कहा है रचना पढ़ते । समझे ना कुछ बात , तभी आगे है बढ़ते ।। क...
रिश्तों की पावन डोर (रोला छंद ) .............. करो नही अभिमान , यहा सब मिटटी भाई । जर जमीन के नाम , करो ना कभी लड़ाई । आपस में मतभेद , सदा घातक है हुआ । जीवन के दिन चार , नही है कोई जुआ ।। रिश्ते है अन...
समय हे बलवान समय हवय बलवान , भेद जी येखर जानव । होवव झन ग उदास , फेर ला अब पहिचानव । कीमत येखर जान , बने जी रस्ता धरले । बनही सब गा काज , परन अब मनमा करले । कइसे होही ...
होवय झन अब हार जी , करत रहव प्रयास । मिलबे करही जीत हर , राख अटल विश्वास ।। राख अटल विश्वास , धीर जी मनमा धरले । बनबे झन कमजोर , परन जी अइसन करले ।। बैरी तोला , देख रोज जी , दुख मा रोवय । ...
मानव बेटी ला बने , देके मया दुलार । करव भेद झन आज तुम ,जिनगी के दिन चार ।। जिनगी के दिन चार , मान बेटी ला देवव । मारव झन जी कोख , परन अब सब गा लेवव ।। होथे लक्ष्मी रूप , मर...
रोवत हे पर्यावरण , परदूषण मा आज । बाढ़त हावय रोज के , गिरही जइसे गाज ।। गिरही जइसे गाज , हवय परदूषण भारी । गाडी घोड़ा आज , बने सबके लाचारी ।। संकट मा ओजोन , परत हे छेदा होवत । कटगे जम्म...
जागे सबके भाग जी , नवा राज मा आज । बनगे हावय अब हमर , छत्तीसगढ़ जी राज ।। छत्तीसगढ़ जी राज , मान होवत हे भारी । होवत हावय आज , काज जम्मो सरकारी ।। हमर नवा पहिचान , सबो के मनला भागे । आगे ...
आवय हमर तिहार जी , करलव पूजा पाठ । तुलसी सालिग्राम के , परत हवय जी गाँठ ।। परत हवय जी गाँठ , होय गन्ना के पूजा । कतको हवय उपास , देव जी नइये दूजा ।। हमर संस्कृति आय , सबो के मनला भावय । ...
होवत हावय आज जी , देखव अत्याचार । नेता मनके राज मा , चलत हवय सरकार ।। चलत हवय सरकार , सबो मनमानी करथे । लूटत हावय रोज , जेब जी अपने भरथे ।। देखत जनता आज , सबो जी दुख मा रोवत । नेता कइस...
हावय नाचत जी सुवा , नोनी मन सब आज । देखत हे मिलके सबो , छोड़ अपन सब काज ।। छोड़ अपन सब काज , गीत जी मनला भावय । देख सुवा के नाच , सबो के मन हरसावय ।। हमर धरोहर आय , साल मा जी ये आवय ! हमर संस्कृति देख , सुवा जी नाचा हावय !!
मानव झन तुम हार जी , करत रहव परयास । मनमा धीरज ला धरे , राख अटल विश्वास ।। राख अटल विश्वास , जीत जी मिलबे करही । मनके हारे हार , पार ग कइसे उतरही ।। मिहनत हावय सार , बात जी येला जानव । ह...
नारी शक्ति रूप ये , झन समझव कमजोर । महिमा जेखर हे कहे , देवन मन चँहु ओर ।। देवन मन चँहु ओर , सार जी येला मानव । कर लेवव पहिचान , रूप ला येखर जानव ।। सुख दुख मा हे संग , आय जी ये अवतारी । ब...
आगे हवय तिहार जी , दिया बने ले बार | घर अंगना सजा बने , करले जी उजियार || आगे हवय तिहार जी , दीया बने ले बार | घर अंगना सजा बने , करले जी उजियार || आगे हवय तिहार जी , दीया ला ले बार | घर अंगना सज...