मानव एक बरोबर कुंडलिया छंद
जागे सबके भाग जी , नवा राज मा आज ।
बनगे हावय अब हमर , छत्तीसगढ़ जी राज ।।
छत्तीसगढ़ जी राज , मान होवत हे भारी ।
होवत हावय आज , काज जम्मो सरकारी ।।
हमर नवा पहिचान , सबो के मनला भागे ।
आगे नवा बिहान , भाग जी सबके जागे ।।
करबे झन तँय भेद जी , एक सबो ला मान ।
मानव गा सब एक हन , मानवता ला जान ।।
मानवता ला जान , करव जी सबके सेवा ।
देखत हे भगवान , करम के देहय मेवा ।।
बात कहत हँव सार , सबो के दुखला हरबे ।
होवय जगमा नाम , करम जी अइसन करबे ।।
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