सुवा नाचा कुंडलिया छंद
हावय नाचत जी सुवा , नोनी मन सब आज ।
देखत हे मिलके सबो , छोड़ अपन सब काज ।।
छोड़ अपन सब काज , गीत जी मनला भावय ।
देख सुवा के नाच , सबो के मन हरसावय ।।
हमर धरोहर आय , साल मा जी ये आवय !
हमर संस्कृति देख , सुवा जी नाचा हावय !!
हावय नाचत जी सुवा , नोनी मन सब आज ।
देखत हे मिलके सबो , छोड़ अपन सब काज ।।
छोड़ अपन सब काज , गीत जी मनला भावय ।
देख सुवा के नाच , सबो के मन हरसावय ।।
हमर धरोहर आय , साल मा जी ये आवय !
हमर संस्कृति देख , सुवा जी नाचा हावय !!
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