मानव झन हार कुंडलिया छंद

मानव झन तुम हार जी , करत रहव परयास ।
मनमा धीरज ला धरे , राख अटल विश्वास ।।
राख अटल विश्वास , जीत जी मिलबे करही ।
मनके हारे हार , पार ग कइसे उतरही ।।
मिहनत हावय सार , बात जी येला जानव ।
हावय कतको नाम , कहत हव येला मानव ।।

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