देवउठनी पूजा कुंडलिया छंद

आवय हमर तिहार जी , करलव पूजा पाठ ।
तुलसी सालिग्राम के , परत हवय जी गाँठ ।।
परत हवय जी गाँठ , होय गन्ना के पूजा ।
कतको हवय उपास , देव जी नइये दूजा ।।
हमर संस्कृति आय , सबो के मनला भावय ।
लेके नवा बिहान , देव उठनी जी आवय ।।

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