नारी शक्ति कुंडलिया छंद


नारी शक्ति रूप ये , झन समझव कमजोर ।
महिमा जेखर हे कहे , देवन मन चँहु ओर ।।
देवन मन चँहु ओर , सार जी येला मानव ।
कर लेवव पहिचान , रूप ला येखर जानव ।।
सुख दुख मा हे संग , आय जी ये अवतारी ।
बोहे जग के भार , सबल हावय जी नारी ।।

         ||मयारू मोहन कुमार निषाद||

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