हमर पर्यावरण कुंडलिया छंद

रोवत हे पर्यावरण , परदूषण मा आज ।
बाढ़त हावय रोज के , गिरही जइसे गाज ।।
गिरही जइसे गाज , हवय परदूषण भारी ।
गाडी घोड़ा आज , बने सबके लाचारी ।।
संकट मा ओजोन , परत हे छेदा होवत ।
कटगे जम्मो पेड़ , देख के सब हे रोवत ।।

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