तोर सुरता मा नींद बैरी आवय नही । का करव मैं कुछू मोला भावय नही ।। तोर चेहरा मोर आंखी मा झुलत रहिथे । अन्न पानी मोला काही अब सुहावय नही ।। रात - दिन तोर सपना अब सताथे मोला । का ब...
छोड़ संसो हे जीना (कुण्डलियाँ छंद) जीना सीखव आज मा , छोड़ काल के बात । आहय जिनगी मा मजा , कटय बने दिन रात ।। कटय बने दिन रात , गोठ ला जी तँय सुनले । बात हवय ये सार , मने मा थोरिक गुन...
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