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छप्पय छंद : - मोहन कुमार निषाद

                  समय हे बलवान समय हवय बलवान , भेद जी येखर जानव । होवव झन ग उदास , फेर ला अब पहिचानव । कीमत येखर जान , बने जी रस्ता धरले । बनही सब गा काज , परन अब मनमा करले । कइसे होही ...

अमृतध्वनि छंद

होवय झन अब हार जी , करत रहव प्रयास । मिलबे करही जीत हर , राख अटल विश्वास ।। राख अटल विश्वास , धीर जी मनमा धरले । बनबे झन कमजोर , परन जी अइसन करले ।। बैरी तोला , देख रोज जी , दुख मा रोवय । ...

बहू बेटी ला मानव कुंडलिया छंद

मानव  बेटी  ला  बने ,  देके  मया  दुलार । करव भेद झन आज तुम ,जिनगी के दिन चार ।। जिनगी  के  दिन  चार , मान  बेटी  ला  देवव । मारव झन जी कोख , परन अब सब गा लेवव ।। होथे  लक्ष्मी  रूप , मर...

हमर पर्यावरण कुंडलिया छंद

रोवत हे पर्यावरण , परदूषण मा आज । बाढ़त हावय रोज के , गिरही जइसे गाज ।। गिरही जइसे गाज , हवय परदूषण भारी । गाडी घोड़ा आज , बने सबके लाचारी ।। संकट मा ओजोन , परत हे छेदा होवत । कटगे जम्म...

मानव एक बरोबर कुंडलिया छंद

जागे सबके भाग जी , नवा राज मा आज । बनगे हावय अब हमर , छत्तीसगढ़  जी राज ।। छत्तीसगढ़ जी राज , मान होवत हे भारी । होवत हावय आज , काज जम्मो सरकारी ।। हमर नवा पहिचान , सबो के मनला भागे । आगे ...

देवउठनी पूजा कुंडलिया छंद

आवय हमर तिहार जी , करलव पूजा पाठ । तुलसी सालिग्राम के , परत हवय जी गाँठ ।। परत हवय जी गाँठ , होय गन्ना के पूजा । कतको हवय उपास , देव जी नइये दूजा ।। हमर संस्कृति आय , सबो के मनला भावय । ...

सेवा करले कुंडलिया छंद

होवत हावय आज जी , देखव अत्याचार । नेता मनके राज मा , चलत हवय सरकार ।। चलत हवय सरकार , सबो  मनमानी करथे । लूटत हावय रोज , जेब जी अपने भरथे ।। देखत जनता आज , सबो जी दुख मा रोवत । नेता कइस...