Posts

जिंदगी का रंग हार जीत संग

कैसे मैं बताऊ , क्या हाल है अभी हुआ । जिंदगी वीरान सी , ख्वाब है धुँवा धुँवा ।। रूठी रूठी राह है , मंजिले है लापता  । सोचता हूँ हर घड़ी , हुई कहा पे है खता ।। खो ना जाऊ मैं कहि , डर यही सत...

स्वागत वन्दना (हिंदी कुंडलिया छंद)

स्वागत वंदन आपका , करते है करजोर । चले कलम अब आपकी , साँझ सबेरे भोर ।। साँझ सबेरे भोर , लेखनी धार बहाये । लिखे जगत की पीर , सभी के मन को भाये ।। होना ना कमजोर , रोज सुख दुख है भागत । रहो...

माँ शारदे वंदना (कुंडलिया छंद)

वंदन माता शारदे , करव सुमरनी तोर । दे हमला वरदान माँ , अरजी हावय मोर ।। अरजी हावय मोर , छंद ला हम सब गावन । आके देबे ज्ञान , तोर माँ लइका हावन । तोर चरन के धूल , हमर माथा के चंदन । करत ह...

बेटी के सुरक्छा (घनाक्षरी छंद)

बेटी ला जी मान मिले , चेहरा उखर खिले । आवव सबो मिलके , बेटी ला बचाव जी । बेटी बिन जग सुन्ना , गोठ सबो होंगे जुन्ना । बेटी ला बचाके अब , नवा जुग लाव जी । बेटी लछमी कहाँथे , तभे जी ओ मान पा...

किसान के पीरा (घनाक्षरी छंद )

बदली हा छावत हे , पानी नइ आवत हे । देखत किसान मन , बड़ पछताय जी । करत सबो बियासी , थोड़ा रोय थोड़ा हासी । जोहत हे रद्धा रोज , थक हार आय जी ।। काही नइ भावत हे , सनसो हा खावत हे । करे का बिधाता ...

गुरु वंदना कुंडलिया छंद

वंदन गुरू चरन करव , लगा चरन मा ध्यान । रद्धा सत के मैं धरव , गुरू मोर भगवान ।। गुरू मोर भगवान , गुरुवर के जस गाले । देय गुरू हे ज्ञान , जान के दरशन पाले ।। गुरू ज्ञान के खान , लगा ले माथ...

उठा लू कलम - दोहे ..........

*उठा कलम मोहन चला , लिखने जग की पीर* । *मानवता को जोड़ने , धरुँ नहीं अब धीर* ।1। *सदा कलम चलती रहे , करूँ नही आराम* । *करूँ जगत कल्याण मैं , करते परहित काम* ।2। *मानवता को जानले , जन वह बने महान* ...