उठा लू कलम - दोहे ..........

*उठा कलम मोहन चला , लिखने जग की पीर* ।
*मानवता को जोड़ने , धरुँ नहीं अब धीर* ।1।

*सदा कलम चलती रहे , करूँ नही आराम* ।
*करूँ जगत कल्याण मैं , करते परहित काम* ।2।

*मानवता को जानले , जन वह बने महान* ।
*पीड़ा सबकी एक है , एक सभी को मान* ।3।

*भेद भाव को छोड़कर , बाँध एकता सूत* ।
*मानव मानव जोड़ कर , बनें शान्ति का दूत* ।4।

*जाती सबकी एक है , यही जगत का सार* ।
*चलना सबको साथ है , तब होगा उद्धार* ।5।

*जात पात के नाम पर , लड़ना है बेकार* ।
*रहें प्यार से हम सभी , होंगे भव से पार* ।6।

*गा लो जग की पीर को , सबको गले लगाय* ।
*भारत अपना देश है , सबके मन को भाय* ।7।

            रचना कॉपीराइट
     मयारू मोहन कुमार निषाद
        गाँव लमती भाटापारा

Comments

Popular posts from this blog

तोर सुरता मा छत्तीसगढ़ी गजल

छोड़ संसो हे जीना (कुण्डलियाँ छंद)

छन्न पकैया छंद