गुरु वंदना कुंडलिया छंद
वंदन गुरू चरन करव , लगा चरन मा ध्यान ।
रद्धा सत के मैं धरव , गुरू मोर भगवान ।।
गुरू मोर भगवान , गुरुवर के जस गाले ।
देय गुरू हे ज्ञान , जान के दरशन पाले ।।
गुरू ज्ञान के खान , लगा ले माथा चंदन ।
मिलय नहीं हर बार , गुरू के करलव वंदन ।।
||मयारू मोहन कुमार निषाद||
गाँव लमती भाटापारा
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