देवव बेटी ला दुलार जी , बन्द करव ये हत्या । जीयन दव अब बेटी ला गा , राखव मनमा सत्या ।1! बेटी होही आज तभे जी , बहू अपन बर पाबे । बेटा कस जी मान देय ले , जग मा नाम कमाबे !2। करव भेद झन जी दूनो ...
*दोहा छन्द की मात्राबाँट का गुरुमंत्र* विषम चरण - 4, 4, 2 (1,2) या 3, 3, 4 (1,2) सम चरण - 4, 4 (2,1) या 3, 3, 2 (2,1) *यहाँ 4 का अर्थ* 2,2 या 2,1,1 या 1,1,2 या 1,1,1,1 है। *121 कदापि नहीं* *इसी प्रकार 3 का अर्थ* 2,1 या 1,2 या 1,1,1 है। *इस मात्राबाँट के बिना दोहे...
गरमी मा बासी बने , मनला सबके भाय । खाले चटनी संग मा , खाये देह जुड़ाय ।। करत किसानी के बुता , हावय आज किसान । खावत बासी पेज ला , उपजावत हे धान ।। रोटी आटा के बने , होथे अबड़ मिठास । खुरमी ...
आय हरेली जी हमर , सबले शुरू तिहार । जुरमिल सबो मनात हे , छाये हवै बहार ।। गेड़ी के जी लव मजा , संगी चढ़के आज । परब हरेली के हवै , बंद हवय सब काज ।। पहिली हमर तिहार ला , सुग्घर संग मनाव । न...
डोंगा हावय जी फँसे , आज बीच मझधार । पानी अब्बड़ जी गिरे , जाबो कइसे पार ।। नदिया पूरा आय हे , कइसे डोंगा लावँ । नहकइया कतको हवे , कइसे पार लगावँ ।। डोंगा कठवा के बने , केंवट ओला लाय । ...