विषय - डोंगा दोहा छंद
डोंगा हावय जी फँसे , आज बीच मझधार ।
पानी अब्बड़ जी गिरे , जाबो कइसे पार ।।
नदिया पूरा आय हे , कइसे डोंगा लावँ ।
नहकइया कतको हवे , कइसे पार लगावँ ।।
डोंगा कठवा के बने , केंवट ओला लाय ।
राम लखन अउ जानकी , तीनो ला नहकाय ।।
डोंगा हावय जी फँसे , आज बीच मझधार ।
पानी अब्बड़ जी गिरे , जाबो कइसे पार ।।
नदिया पूरा आय हे , कइसे डोंगा लावँ ।
नहकइया कतको हवे , कइसे पार लगावँ ।।
डोंगा कठवा के बने , केंवट ओला लाय ।
राम लखन अउ जानकी , तीनो ला नहकाय ।।
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