विषय - डोंगा दोहा छंद

डोंगा हावय जी फँसे , आज बीच मझधार ।
पानी अब्बड़ जी गिरे  , जाबो कइसे पार ।।

नदिया पूरा आय हे , कइसे डोंगा लावँ ।
नहकइया कतको हवे , कइसे पार लगावँ ।।

डोंगा कठवा के बने , केंवट ओला लाय ।
राम लखन अउ जानकी , तीनो ला नहकाय ।।

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