परयावरन पेड़ के जतन छन्न पकैया छंद

छन्न पकैया छन्न पकैया , जुरमिल पेड़ लगाबो ।
परयावरन ल हम सब भइया , आवव सबो बचाबो ।

छन्न पकैया छन्न पकैया , परदूसन हे भारी ।
पेड़ लगावत कोन हवय जी , देखव हे लाचारी ।

छन्न पकैया छन्न पकैया , उजड़त हे रुखराई ।
गाडी घोड़ा रोज चलत हे , बउरे जी सब भाई ।

छन्न पकैया छन्न पकैया , आज सबो हे सोये ।
बाढ़े देखय परदूसन ला , मुड़ धर सब गा रोये ।

छन्न पकैया छन्न पकैया , पानी पेड़ ग लाथे ।
हरियर हरियर खेत खार हा , सबके मनला भाथे ।।

           मयारू मोहन कुमार निषाद

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