स्वागत वंदन आपका , करते है करजोर । चले कलम अब आपकी , साँझ सबेरे भोर ।। साँझ सबेरे भोर , लेखनी धार बहाये । लिखे जगत की पीर , सभी के मन को भाये ।। होना ना कमजोर , रोज सुख दुख है भागत । रहो...
बेटी ला जी मान मिले , चेहरा उखर खिले । आवव सबो मिलके , बेटी ला बचाव जी । बेटी बिन जग सुन्ना , गोठ सबो होंगे जुन्ना । बेटी ला बचाके अब , नवा जुग लाव जी । बेटी लछमी कहाँथे , तभे जी ओ मान पा...
बदली हा छावत हे , पानी नइ आवत हे । देखत किसान मन , बड़ पछताय जी । करत सबो बियासी , थोड़ा रोय थोड़ा हासी । जोहत हे रद्धा रोज , थक हार आय जी ।। काही नइ भावत हे , सनसो हा खावत हे । करे का बिधाता ...