नारी शक्ति
त्याग समर्पण सेवाभावना , नारी का सिंगार है
बहता प्रेम का वत्सल धारा , ममता बना आपार है ।।
देवतुल्य सदा पूज्यनीय , ये सभी गुणों की खान है ।
सबको देती शीतल छाया , नही कोई इससे महान है ।।
हँसकर है सब सह लेती माँ , होती ना कभी उदास है ।
अपने गम को सदा भूल के , देती माँ सदा उजास है ।।
ममतामयी नारी शक्ति यह , बहती बनकर धार है ।
अपने में सब लिये समा , माँ महिमा तेरी आपार है ।।
कर्ज तेरी माँ चुका ना पाये , मानुष और भगवान भी ।
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