करूँ मैं आराधना सदा माँ भारती की ................


*गाउँ मैं आराधना सदा माँ भारती की ।*
*मात शारदे मुझे , ऐसी वरदान दे ।।*

*हिन्दू को प्रणाम मुस्लिम को  सलाम करूँ ।*
*सीमा में भी लड़ आउ ऐसी स्वाभिमान दे ।।*

*गरब गुमान छोड़ , करूँ मैं आराधना ।*
*माँ मेरी विपत हर , मुझको तू ज्ञान दे ।।*

*परहित साधना हो , यही मेरी कामना है ।*
*भेद भाव ना करूँ माँ , ऐसी मुझे आन दे ।।*

*परहित मर जाऊ , दिन हिन को बचाउ ।*
*अंतरात्मा को माँ , ऐसी मेरी जान दे ।।*

*बैरियों से लड़ जाऊ , प्राण अपना गवाँउ ।*
*अमर हो नाम मेरा , ऐसी मुझे शान दे ।।*

*रहे सब जीव सुखी , कोई भी ना रहे दुखी ।*
*लिखूँ सदा पीर माँ , बस ऐसी पहिचान दे ।।*

         *रचना कॉपीराइट*
    *मयारू मोहन कुमार निषाद*
       *गाँव लमती भाटापारा (छ.ग.)*
    *मो.नं. 7999844633*

Comments

Popular posts from this blog

तोर सुरता मा छत्तीसगढ़ी गजल

कविता लिखे के पहिली यहु ला गुनव

माँ शारदे वंदना (कुंडलिया छंद)