वंदना माँ शारदे ज्ञान वरदान दे (कवि सम्मेलन)

माता वीणापाणि मुझे ज्ञान वरदान दे ।
स्वर को तू मातु मेरे आज तू सवार दे ।
होना जाए भूल कहि भूल से भी मातु मेरे ।
ज्ञान मुझे तू माँ आज भण्डार दे ।।

बालक है हम माँ तू है जगजननी ।
हर के अँधेरे हमे गया का प्रकाश दे ।।
मंगलमय हो माता सब कारज ।
विघ्न को हर माँ आशीष आपार दे।।

जाती धर्म भेदभाव , छोड़कर ये प्रभाव ।
आओ सभी मिलकर , गीत नइ गाइये ।
सुमत का हो जी डोर , फैले यही चहुँओर  ।
रूठे नही कोई अब , सबको मनाइये ।

आओ सभी ठाने यही , बात सभी माने यही ।
पुरखो की शान को जी , सदा ही बढ़ाइये ।
अपना है स्वाभिमान , इस पे हमे गुमान ।
आओ रक्षा करे अब , प्रण यही खाइये  ।।

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