गुरु के चरन मा सरग जान ले (शक्ति छंद)
गुरु के चरण मा सरग जान ले ।
मिले हे इहाँ तँय बने मान ले ।
कहे गा गुरु बिन कहाँ ज्ञान हे ।
मिलय ना कहूँ जी बड़े खान हे।।
गुरु के चरन मा सबे धाम हे ।
सबो ले बड़े तो गुरु नाम हे ।
बिना जी गुरु नइ गये पार हे ।
करे गुरु सेवा इहाँ सार हे ।।
मिले हे अजादी तहूँ जानले ।
लड़े हवै पुरखा बने मानले ।।
कहे सबो झन हे इही धाम हे ।
जपव जी हरि के एके नाम हे ।।
हवै जगमा जाती कइ नाम के ।
कहै झन ग बाँटव बिना काम के ।।
भले झन रहन हम सबो संग मा
बने हन सबे हम उही रंग मा ।।
कभू झन रहव तुम धरम बाँट के ।
खुशी ला मनालव अपन छाँट के ।
रहन सबो मिलके बने गाँव मा ।
मया हे बसे गा जिहा ठाँव मा ।।
लड़व झन कभू तुम सबो जान के ।
करव भेद झन जी अलग मान के ।
दया अउ मया हर इहाँ सार हे ।
करे पुन बिना नइ गये पार हे ।।
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