ना भटक यै राही ये मंजिल खुद तेरे पास है
बढ़ना है आगे और पाना है मंजिल ।
किनारो से करलो दरकार मेरे यारा ।।
भटकते हुये ना मिला है किसी को ।
बना लो खुदी को सरकार मेरे यारा ।।
कब तक है यूँ खाते रहोगे जी ठोकर ।
अब बैठो ना ऐसे तुम बेकार मेरे यारा ।।
है पाया उसी ने सभी कुछ यहा पर ।
की जिसने खुदको बेकरार मेरे यारा ।।
उठो अब है मौका पहचानो इसे तुम ।
बना लो खुद ही को संसार मेरे यारा ।।
जो भाये ना मनको उसे अब मिटा ओ ।
जोड़ो मन से मन की सितार मेरे यारा ।।
ना सोचो कभी भी बेमतलब की बाते ।
सब तुझमे है समाया ये सार मेरे यारा ।।
ना रूक अब यहा पे आगे बढ़ते चले जा ।
ले खुद को इस भव से अब पार मेरे यारा ।।
हार की बात मन से मिटाओ सदा तुम ।
हो जगमे तुम्हारी जय जयकार मेरे यारा ।।
ये जीवन पल भर की ना कर स्वाभिमान ।
बस ले इसको अपना है आधार मेरे यारा ।।
||मयारू मोहन कुमार निषाद|
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