वीरांगना दाई बिलासा (आल्हा छंद)

*वीरांगना दाई बिलासा ..............*

*अरपा नदिया के तीरे मा , रिहिस हवय जी इक ठन गाँव ।*
*दाई बिलासा जेला बसाय , पड़िस बिलासापुर हे नाँव ।1।*

*दक्षिण कोशल राज रिहिस हे , राजा रहय कल्याण साय ।*
*रतनपुर जेखर राजधानी , राजा सुग्घर राज चलाय ।2।*

*इक झन केंवट रामा नाव के , डेरा  नदियाँ तिरा जमाय ।*
*बसगे अपन लोग बाल संग , सुग्घर जिनगी अपन बिताय ।3।*

*मारय मछली खेलय फांदा , जंगल मा जी करय शिकार ।*
*बेटी जेखर रहिस बिलासा , चमकय ओखर जी तलवार ।4।*

*देखे सुग्घर चिक्कन चादँन , रंग रूप के रिहिस खदान ।*
*रामा केंवट के जी बेटी , चारो कोती पावय मान ।5।*

*बंशी केंवट संग बिलासा , जोड़ी सबके मनला भाय ।*
*चलय वीर जब दूनो संग म , देखय बैरी मन थरराय ।6।*

*इक दिन राजा वीर साय जी , जंगल जावय करे शिकार ।*
*संग सिपाही पाछू राहय , होंगे राजा ऊपर वार ।7।*

*जंगल मा अब राजा इक झन , तड़पय मारे भूखे प्यास ।*
*दाई बिलासा सुनके आवय , बनगे राजा के जी खास ।8।*

*दाई बिलासा बंशी मिलके , रोजे सेवा खूब बजाय ।*
*सेवा ले खुश होके राजा , संग अपन दूनो ला लाय ।9।*

*देवय आसन राजा गढ़ मा , मान अबड़ जी सुग्घर पाय ।*
*पाके सुग्घर मान गऊन ला , दाई बिलासा जी मुस्काय ।10।*

               *रचना कॉपीराइट*
            *||मयारू मोहन कुमार निषाद||*
         *गाँव लमती भाटापारा (छ.ग.)*
       *मो.नं. - 7999844633*

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