वंदन गुरू चरन करव , लगा चरन मा ध्यान । रद्धा सत के मैं धरव , गुरू मोर भगवान ।। गुरू मोर भगवान , गुरुवर के जस गाले । देय गुरू हे ज्ञान , जान के दरशन पाले ।। गुरू ज्ञान के खान , लगा ले माथ...
*उठा कलम मोहन चला , लिखने जग की पीर* । *मानवता को जोड़ने , धरुँ नहीं अब धीर* ।1। *सदा कलम चलती रहे , करूँ नही आराम* । *करूँ जगत कल्याण मैं , करते परहित काम* ।2। *मानवता को जानले , जन वह बने महान* ...
पावन भुईया महतारी के अउ सूत उठ करव परनाम जेखर मया के छइंहा मा जिहा बसे हावय मोर गाँव ।। डोगरी पहाड़ी रुख राई ले सजे हावय दरबार अउ आमा अमली बर पिपर के जिहा हावय सुघ्घर छाँव ।। ग...
कुंडलिया छंद - मोहन कुमार निषाद जिनगी के आशा आसा जादा झन करव , जिनगी के दिन चार । भाग दउड़ जी हे लगे , थकना हे बेकार । थकना हे बेकार , रोज आघू हे बढ़ना । नइ होवन कमजोर , नवा रद्दा हे गढ़ना ...