गद्दारो को जवाब

महफिल है यहा रोज सजती , सत्ता के गलियारों में | बिकते है ईमान यहा , सस्ते दाम बाजारों में || पहन मुखौटा आज बैठे है , देश में कितनो गद्दार हरलो इनके प्राण को , माँ भारती का कर्ज उतार नामो और निशान मिटा दो उनकी , जिनको देश नही भाता है ओवैसी अफजल के जैसे , वन्दे मातरम् है नही गाता बनकर कोई एक कन्हैया , सामने जब आ जाता है भारत तेरे टुकड़े होंगे , कहकर आवाज लगाता है || शर्म नही आता है इनको , नमक हरामी करते है जिस मिटटी में जन्म लिये है , कीचड़ उसी कहते है अफलज और कसाब ओवैसी , मनको इनके भाता है भारत माता का होके पूत , अपनों को ही मरवाता है || सौदा आज बनाके रखदी , भारत माँ के शान को चन्द पैसो के कारण देखो , मिटा रहे सम्मान को || पहन के कुर्ता बैठे है , आज देखो कितनो गद्दार नमक हरामी भ्रष्टाचारि , करते है ये अत्यचार अब तो इनको सबक सिखादो , जागो मेरे नव जवान रखदो सर कुचल के इनका , बढ़ाओ भारत माँ का शान ||

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