छत्तीसगढ़ी हास्य ब्यंग

नवा साल के बधाई 31 दिसम्बर के रात कन मैं मस्त खा पीके सूत गेव बिहनिया उठके देखथव ता मोर चेहरा मारे खुशी के लाल हे काबर की आज नवा साल हे | मैं सोचव चलके कोनो ला बधाई देना चाहिए उही डहर जात रहेंव तइसने भट्ठी मेर कका मिलगे मैं कहेव् कका ..... हैप्पी न्यू ईयर कका कहिथे ..... बन्द हे भट्ठी , नई मिलत हे दारु अउ बियर ता काके तोर हैप्पी न्यू इयर मैं कहेव ये नई समझय फेर आघू बढेव ता प्राइमरी स्कुल मेर एक झन शिक्षाकर्मी गुरूजी ला भेट परेव् मैं सोचेव् गुरूजी ला बधाई देना चाहिए मैं कहेव् गुरूजी राम राम ता गुरूजी कहिथे तोर हमर का काम मैं कहेव् नवा साल के बधाई ता गुरूजी कहिथे .... उही खुर्सी ये उही टेबल हे अउ उही स्टूल हे रे भाई फेर मोला काके देवत हस तै हर बधाई करथन हड़ताल तेमा पुलिस के लाठी बम हे अउ लड़थन ओतके रे भाई जतका हमर में दम हे | (मैं कहेव् एहु नई समझय ) आघू बढ़ेव् ता ओती ले हमर गाँव के सरपंच आवत राहय मैं कहेव् सरपंच साहेब .... नवा साल के बधाई ता सरपंच कहिथे ....... तै तो हमर हाल ला जानथच रे भाई राहत काल चलत नइये , जनता देवत हे गारी चुनाव मा ओतका पईसा खर्चेव , हावय बड़ लाचारी | (मैं कहेव् एहु नई समझय ) आघू बड़ेव् ता अपन दवाखाना मा डॉक्टर साहब बइठे राहय मैं सोचेव् कम से कम डॉक्टर साहब तो समझही मैं कहेव् डॉक्टर साहब .....नवा साल के बधाई डॉक्टर कहिथे ........ उही हाड़ा ये उही मॉस ये अउ उही खून लाल हे फेर का के ये नवा साल हे | ( मैं कहेव् एहु नई समझय ) अंत मा हताश निराश घर कोत लहुटत राहव तइसने एकझन दूकान वाले मिलगे मैं सोचेव् चलव इहि ला दे दव बधाई मैं कहेव् सेठ जी राम राम नवा साल के बधाई ता सेठ कहिथे ...... उही नून ये उही तेल गुड़ ये रे भाई फेर काके देवत हस मोला तै बधाई दिनों दिन महगाई बाढ़े , जनता सबो बेहाल हे कतको बदलत हे सरकार , फेर काके ये नवा साल हे ||

     मयारू मोहन कुमार निषाद

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