बहुत हुआ अब राजनीति का , गंदा खेल को बन्द करो | नमक यहा की खाकर , आज नमक हरामी ना करो || हाफिज और अफजल की भाँति , हाल तुम्हारा भी होगा | मरोगे तुम कसाब की मौत , हजम नही पानी होगा || भूल गये तुम भारत की , मर्यादा और बड़प्पन को | जिसने इतना है मान दिया , माँ की गौरव सनातन को || जाती धर्म का बोल आज , किसके दम पर है बोल गया आस्तीन में बैठा साँप आज , सारे भेद है खोल गया || वन्दे मातरम् ||मयारू मोहन कुमार निषाद||

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