दिया कखरो बुतागे , कुल के | कखरो घर अंधियारी छागे || करम के नोहय लेख बिधाता | ये कईसन बिपत्ति आगे || काखर पाप के दे सजा , दया थोरिक घलो नई लागे | मासूम लईका मनला मारे , अब ये कईसन दिन आगे || दाई ददा जी कलपत हावय , कहा मोर बेटा गवांगे | कईसन खेल खेले बिधाता , मोर कुल के दिया बुतागे || ||मयारू मोहन कुमार निषाद||

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