ढूढ़ता हु इन राहो में , मंजिले कोई नई !
हो ना जाउ खुद से जुदा , खो ना जाउ मै कहि !!
मुझको इतना बतला दे , तू यै मेरे ह्मनशि !
चाहता है ये दिल तुझको , फूल जैसे महकशि !!
भौरा बनकर झूमे ये मन , घुमे हरपल तेरी गली !
धड़कन में नाम तेरा है , हर साँसों में लहर चली !!
है वार दू ये जिंदगी , तुझपे यै जा निशार करू !
तुही इस दिल की पूजा है , तुझसे मैं कितना प्यार करू !!
दिल में बसी है तू ही तू , हर सांस में नाम तेरा आये !
तेरी यादो का है पहरा , हरपल मेरे मनको भाये !!
!!मयारू मोहन कुमार निषाद!!
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