बरवै छंद बेटी बेटा हावय , एक समान । कर ही मिलके सेवा , तँय हर जान ।। दे अधिकार बरोबर , होहय नाम । संग रही जीयत ले , आहय काम ।। बेटी जस बगराही , जगमा तोर । बेटी बनके लक्ष्मी , करही शोर ।। ...
*आज 13 मई महतारी दिवस विशेष (कुंडलिया छंद*) •••••••••••• महतारी के हे मया , सबले बड़का जान । जनम देय सबला हवै , मानव अउ भगवान ।। मानव अउ भगवान , सबो कोरा मा आये । जिनगी अपन बिताय , मया ल...
आल्हा छंद श्री मोहन कुमार निषाद बैरी लाहो झनले हमर मितानी देखत बैरी , हमला झन समझव कमजोर । भारत माँ के बेटा अन हम , निछ देबो खर्री ला तोर । हितवा मनके संगी हन हम , बैरी मनबर सउहत क...
रुखराइ ला झन तँय काट , इखरो दुख संगे मा बाँट । अपने जीव असन तँय जान , बेटा कस येमन ला मान ।। हावय जिनगी के आधार , पेड़ छाँव देथे आपार । लकड़ी येखर आथे काम , जानव सब झन येखर दाम ।। बनथे य...