छत्तीसगढ़ी गीत

पावन भुईया महतारी के अउ सूत उठ करव परनाम येखर मया के छइंहा मा जिहा बसे हावय मोर गाँव डोगरी पहाड़ी रुख राई ले सजे हावय दरबार अउ आमा अमली बर पिपर के जिहा हावय सुघ्घर छाँव गांवे मा सहाडा देव बिराजे अउ बईठे हावय महामाया दाई अउ ठाकुर देव ला करव पैलगी शीतला दाई ला माथ नवाई माटी के घर मा माटी के खपरा छानही परवा छवाय हावय अउ गऊ माता के गोबर मा सुघ्घर घरअंगना लिपाय हावय की होत बिहनिया गाँव बस्ती मा चिरई चिरगुन के बसेरा हे चिंव चाव नरियाके बताथे आगे नवा सबेरा हे की हाका पारत गाँव बस्ती मा राउत भईया आवत हे गऊ माता के बछरू पिला हर देखत रस्ता निहारत हे धरके नागर बइला तुत्तारि किसाने हा खेत मा जाथे अउ बासी लेके खेतहारीन हा खेत खार मा आवत हे माटी हमर महतारी ये भईया करम किसानी मितानी ये मीठ जुबानी लोटा भर पानी इही हमर मेहमानी ये !! रचना 🌷मयारू मोहन कुमार निषाद🌷 गाँव लमती भाटापारा ||

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